फिल्म समीक्षाओं मे ईमानदारी का पतन : क्यों 3.5 स्टार अब ‘जीरो स्टार ‘ के बराबर है|
एक दौर था जब 2-स्टार रेटिंग का मतलब होता था कि देखने लायक है—यानी फिल्म में कमियां तो हैं, लेकिन उसे देखा जा सकता है। लेकिन आज के दौर मे जब किसी फिल्म को 3.5 स्टार मिलते हैं और फिर भी उसे देखना किसी सजा जैसा लगे, तो समझ लीजिए कि सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुका है। आइए देखते है कुछ कारण जिसकी वजह से मूवीज की समीक्षा का स्टार इतना गिर गया है|


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